सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त, 2028 तक सभी सेवारत प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है। यह कदम निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए उठाया गया है।
यह घटनाक्रम उच्चतम न्यायालय के 1 सितंबर, 2025 के फैसले (उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट व अन्य) के बाद आया है, जिसमें न्यायालय ने निर्देश दिया था कि आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को नौकरी में बने रहने के लिए टीईटी परीक्षा पास करनी ही होगी।
बाद में, उच्चतम न्यायालय ने 29 मई, 2026 के पुनरीक्षण आदेश के माध्यम से योग्यता प्राप्त करने की अवधि को दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दिया। इसके अनुसार, शिक्षकों को 31 अगस्त, 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करना होगा, जबकि पहले यह समय-सीमा 2027 थी।
शिक्षक संगठनों और व्यक्तिगत शिक्षकों की ओर से दाखिल 60 से अधिक समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने अपना 36 पन्नों का निर्णय सुनाया।
कोर्ट ने कहा कि रिव्यू याचिकाओं का दायरा बहुत सीमित है और इसे अपील का दूसरा रूप नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने समीक्षा योग्य कोई त्रुटि न पाते हुए समय-सीमा में विस्तार के साथ सभी समीक्षा याचिकाएं खारिज कर दीं और स्पष्ट किया कि अब कोई और याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी।
TET Exam: केस टाइमलाइन और PDF लिंक
📌 इस मामले को आसान भाषा में समझें
- 1 सितंबर, 2025 (मूल फैसला - Main Case): Anjuman Ishaat vs State of Maharashtra केस में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि आरटीई (RTE) से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को नौकरी में बने रहने के लिए 2027 तक TET पास करना अनिवार्य है।
👉 मूल आदेश देखें: Supreme Court Main Judgment - 01 Sept 2025 PDF - रिव्यू याचिकाएँ (Review Petitions Filed): 1 सितंबर के फैसले से प्रभावित होकर उत्तर प्रदेश सरकार (State of U.P.) और देश भर के शिक्षक संघों ने सुप्रीम कोर्ट में 60 से अधिक पुनर्विचार याचिकाएँ दायर कीं।
👉 याचिका केस स्टेटस देखें: Review Petition Case Status - Diary No. 53434/2025 - 29 मई, 2026 (अंतिम संशोधन आदेश - Final Order): यूपी सरकार व अन्य की रिव्यू याचिकाओं (State Of U.P. vs Anjuman Ishaat) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राहत दी और TET पास करने की अंतिम तिथि 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त, 2028 कर दी।
👉 संशोधित अंतिम आदेश देखें: State Of U.P vs Anjuman Ishaat-E-Taleem Trust Order on 29 May, 2026 PDF
कोर्ट की मुख्य टिप्पणियाँ और तर्क
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी पास होना संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। आरटीई अधिनियम एक बाल-केंद्रित कानून है और शिक्षकों की सेवा बच्चों के शैक्षिक भविष्य की कीमत पर नहीं आ सकती।
- समय-सीमा पर तर्क: शिक्षक संघों और राज्यों का तर्क था कि यह सेवा शर्तों में पूर्वव्यापी बदलाव है जिससे बड़े पैमाने पर शिक्षक बेरोजगार हो सकते हैं। पीठ ने इसे खारिज करते हुए कहा कि आरटीई अधिनियम लागू हुए डेढ़ दशक से अधिक का समय बीत चुका है। धारा 23 के प्रावधान शिक्षकों को स्तर सुधारने का पर्याप्त समय देते हैं।
- अनुच्छेद 142 के तहत राहत: अनुच्छेद 142 के तहत राहत देते हुए कोर्ट ने राज्यों व प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि टीईटी वर्ष में कम से कम दो बार (प्रत्येक छह माह पर) आयोजित की जाए, ताकि असफल शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिले।
देशभर में फैसले का प्रभाव
इस फैसले से देशभर के लगभग 50 लाख से अधिक सरकारी और सहायता प्राप्त (Aided) प्राथमिक विद्यालयों के सेवारत शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं:
- उत्तर प्रदेश: मूल रूप से UP से जुड़े मुकदमे से शुरू हुए इस मामले में लगभग 1.5 लाख से 2 लाख प्राथमिक शिक्षक प्रभावित हैं।
- पश्चिम बंगाल: राज्य के लगभग 80,000 से 1 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
- बिहार और महाराष्ट्र: सहायता प्राप्त और सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के अनुमानित 1.5 लाख से अधिक शिक्षकों को 31 अगस्त, 2028 से पहले टीईटी उत्तीर्ण करना होगा।
- झारखंड: इस आदेश का असर राज्य के करीब 40 हजार प्राइमरी शिक्षकों पर पड़ेगा।
- अन्य राज्य: मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु आदि राज्यों में भी 2010-2011 से पूर्व सेवा में आए हजारों शिक्षकों के पास टीईटी पास की योग्यता नहीं है।
राज्यों द्वारा उठाए जा रहे कदम
- पश्चिम बंगाल (WBBPE), उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने प्राथमिक शिक्षा बोर्डों को हर छह महीने में टीईटी आयोजित करने के निर्देश जारी किए हैं।
- शिक्षा विभागों ने आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है, जिनके पास टीईटी प्रमाणपत्र नहीं है या जिनकी सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से अधिक का समय शेष है।
